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Home मध्य प्रदेश सीएम डॉ. मोहन यादव की मंजूरी से अगले 5 साल जारी रहेगा 'शौर्या दल', महिलाओं की साइलेंट आर्मी बनेगी समाज की ताकत

सीएम डॉ. मोहन यादव की मंजूरी से अगले 5 साल जारी रहेगा 'शौर्या दल', महिलाओं की साइलेंट आर्मी बनेगी समाज की ताकत

भोपाल(ईन्यूज एमपी)- मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में संचालित 'शौर्या दल' को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने की मंजूरी मिल गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की इस महत्वाकांक्षी योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालित करने का निर्णय लिया गया है।

वर्ष 2013 में प्रदेश के छह जिलों से शुरू हुई यह पहल आज पूरे मध्यप्रदेश में महिला सुरक्षा, जागरूकता और सामाजिक बदलाव का सशक्त माध्यम बन चुकी है। वर्तमान में शौर्या दल से 22.52 लाख से अधिक महिलाएं और किशोरियां जुड़ी हुई हैं, जो समाज में जागरूकता और सुरक्षा का मजबूत नेटवर्क तैयार कर रही हैं।

शौर्या दल की सदस्य महिलाएं घरेलू हिंसा, बाल विवाह, मानव तस्करी, लैंगिक भेदभाव और महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अन्य अपराधों की रोकथाम में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर वे संबंधित विभागों और प्रशासन को सूचित करने के साथ-साथ सामुदायिक स्तर पर संवाद और समझाइश के माध्यम से समस्याओं के समाधान का प्रयास करती हैं।

इस विशाल नेटवर्क में 7.64 लाख से अधिक किशोरियां एवं छात्राएं शामिल हैं, जबकि लगभग 14.88 लाख गृहणियां और अनुभवी महिलाएं भी इसका हिस्सा हैं। युवा ऊर्जा और सामाजिक अनुभव का यह समन्वय समाज में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बन रहा है।

महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार शौर्या दल केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के प्रति महिलाओं को जागरूक करने का भी कार्य कर रहा है। विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में यह पहल महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने में प्रभावी साबित हुई है।

प्रदेश सरकार का मानना है कि शौर्या दल ने महिला सशक्तिकरण को व्यवहारिक रूप दिया है। यही कारण है कि इस मॉडल को आगे भी जारी रखते हुए महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया है।

सरकार के इस फैसले से आने वाले वर्षों में महिलाओं की सामाजिक भागीदारी, सुरक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूकता को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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