भोपाल(ईन्यूज एमपी)- मध्यप्रदेश के नगरीय निकायों में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी लगातार बढ़ती जा रही है। प्रदेश के नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषदों में लगभग 5 हजार नियमित अधिकारियों के पद रिक्त होने से प्रशासनिक और विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। कई निकायों में एक ही अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार देकर काम चलाया जा रहा है, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन और जनसेवाओं पर असर पड़ रहा है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO), इंजीनियर, वित्त अधिकारी और अन्य तकनीकी पदों की कमी है। कई नगर निकायों में नियमित अधिकारियों के अभाव में अतिरिक्त प्रभार व्यवस्था लागू है, जिसके कारण निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। अतिरिक्त प्रभार व्यवस्था पर सख्ती स्थिति को देखते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने रिक्त पदों पर अनधिकृत प्रभार देने की व्यवस्था समाप्त कर दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब केवल पात्र अधिकारियों को ही नियमानुसार प्रभार दिया जाएगा और सभी प्रस्ताव संचालनालय की स्वीकृति से ही लागू होंगे। विकास कार्यों पर पड़ रहा असर अधिकारियों की कमी का असर शहरी विकास परियोजनाओं, निर्माण कार्यों, कर वसूली, स्वच्छता प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं पर दिखाई दे रहा है। कई नगर निकायों में तकनीकी और प्रशासनिक निर्णय समय पर नहीं हो पा रहे हैं, जिससे योजनाओं की गति धीमी पड़ रही है। भर्ती की तैयारी तेज राज्य सरकार लंबे समय से रिक्त पदों को भरने की दिशा में प्रयास कर रही है। इससे पहले नगरीय निकायों में हजारों रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी भी की जा चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित नियुक्तियां होने से नगरीय निकायों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी। सरकार की प्राथमिकता सरकार का कहना है कि शहरी क्षेत्रों के तेजी से विस्तार को देखते हुए नगर निकायों को पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराना आवश्यक है। रिक्त पदों की पूर्ति और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए चरणबद्ध कार्रवाई की जा रही है।