धार (ईन्यूज़ एमपी): धार की ऐतिहासिक भोजशाला में सोमवार को एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया। करीब 750 वर्षों में पहली बार भोजशाला में विधि-विधान से मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना हुई, जिसमें मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने धार को बड़ी सौगात देते हुए मां सरस्वती लोक और राजा भोज शोध संस्थान की स्थापना की घोषणा की। भोजशाला में पूजा-अर्चना के बाद आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि धार राजा भोज की नगरी है और यह भूमि ज्ञान, संस्कृति तथा सनातन परंपरा की गौरवशाली धरोहर रही है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के फैसले के बाद धार एक नई दिशा में आगे बढ़ रहा है और अब इसे पर्यटन, साहित्य और सांस्कृतिक अध्ययन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने कहा कि न्यायालय के निर्णयों को प्रभावी ढंग से लागू कराने की क्षमता प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दिखाई दी है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत और औद्योगिक विकास को लेकर भी कई घोषणाएं कीं। उन्होंने बताया कि धार जिले में 88 करोड़ रुपये से अधिक लागत के 12 विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया गया है। साथ ही जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत प्राचीन बावड़ियों, तालाबों और जल संरचनाओं के संरक्षण एवं पुनर्जीवन का कार्य भी तेज़ी से किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि मां सरस्वती लोक और राजा भोज शोध संस्थान की स्थापना से धार राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा, शोध, संस्कृति और पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर