सीधी ( ईन्यूज एमपी) सीधी जिले का बहुचर्चित ट्रैक्टर ऋण घोटाला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। कलेक्टर विकास मिश्र के निर्देश पर जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के गांधीग्राम शाखा से जुड़े 124 ट्रैक्टर ऋण प्रकरणों की जांच के लिए 6 सदस्यीय टीम गठित की गई है, जिनके द्वारा दस्तावेजों की पड़ताल शुरू कर दी गई है। लेकिन कलेक्टर द्वारा संसोधित आदेश के परिपालन में अधिकारियों को पसीना छूट रहा है कारण कि बैंक अधिकारी यह दो करोड़ के फर्जीवाड़े में खुद संलिप्त हैं और अधिकारियों को दस्तावेज मुहैया कराने में आनकानी कर रहे हैं । जानकारी के अनुसार, उक्त शाखा में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ट्रैक्टर ऋण स्वीकृत कर राशि आहरित किए जाने के आरोप हैं। बताया जा रहा है कि इस मामले में 2 करोड़ रुपये से अधिक की अनियमितता सामने आई थी, जबकि वास्तविक किसानों को लाभ नहीं मिल पाया। इस घोटाले को लेकर पूर्व विधायक केदारनाथ शुक्ल द्वारा मुख्यमंत्री से जांच की मांग की गई थी। तब जाकर प्रशासन ने मामले को पुनः गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कराई है। जांच में कई बिंदुओं पर फोकस जांच टीम बैंक रिकॉर्ड, ऋण स्वीकृति प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार, बैंक के तत्कालीन अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ ही प्रकरण तैयार करने वाले तथाकथित लीगल एडवाइजरों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। और जिस दिन सच्चाई सामने आई तो एक तथाकथित वकील साहव के विश्वसनीयता पर सबाल खड़े होंगें और धारित दायित्व दागदार होगा । करीब तीन वर्ष पूर्व भी इस मामले की जांच प्रारंभ हुई थी, लेकिन कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। अब नई टीम के गठन के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि मामले की परतें खुलेंगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी। गांव-शहर में चर्चा का विषय पूर्व विधायक केदारनाथ शुक्ल द्वारा पूर्व में उठाई गई मांग पर आला अधिकारियों द्वारा पानी फेरने के कारण फाइल धूल फांक रही थी । लेकिन वर्तमान जिला प्रशासन द्वारा ट्रैक्टर ऋण घोटाले के फिर से सामने लाने के बाद यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रभावित किसानों को न्याय मिलने की उम्मीद के साथ प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं कि विकास जैसा जिला प्रशासन जरूर दूध का दूध पानी का पानी करके दिखायेंगे ...