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एमपी के 14 गांवों के नीचे मिला लौह अयस्क का खजाना, 1081 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन की तैयारी

जबलपुर(ईन्यूज एमपी)- मध्य प्रदेश में खनिज संपदा को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। जबलपुर जिले की तीन तहसीलों के 14 गांवों की जमीन के नीचे लौह अयस्क (आयरन ओर) का बड़ा भंडार मिलने की पुष्टि हुई है। लगभग 1081 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस खनिज भंडार से प्रदेश सरकार को भविष्य में भारी राजस्व मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार जबलपुर जिले की मझौली, सिहोरा और पनागर तहसील के विभिन्न क्षेत्रों में चार बड़े खनिज ब्लॉक चिन्हित किए गए हैं। इनमें लौह अयस्क के साथ-साथ मैंगनीज और लैटराइट जैसे खनिज भी पाए गए हैं। इन ब्लॉकों का सीमांकन किया जा रहा है और इसकी रिपोर्ट खनिज विभाग के मुख्यालय को भेज दी गई है।

खनिज विभाग के अधिकारियों के अनुसार सबसे बड़ा ब्लॉक मझौली के दर्शनी क्षेत्र में लगभग 936 हेक्टेयर में फैला हुआ है। इसके अलावा सिहोरा के झीटी और कोड़ामुकुर क्षेत्र में लगभग 86 हेक्टेयर तथा पनागर के कटैया क्षेत्र में करीब 49 हेक्टेयर में खनिज भंडार पाया गया है। इन सभी को मिलाकर कुल क्षेत्रफल 1081 हेक्टेयर से अधिक है।

बताया जा रहा है कि यह पहला मौका है जब जबलपुर जिले में इतने बड़े क्षेत्र में लौह अयस्क का भंडार मिला है। इससे पहले यहां की खदानें अपेक्षाकृत छोटी थीं, जिनका क्षेत्रफल सामान्यतः 20 से 35 हेक्टेयर के बीच होता था।

खनिज विभाग के अनुसार इन क्षेत्रों में खनन के लिए नीलामी प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक यहां 10 लाख टन से अधिक लौह अयस्क का भंडार हो सकता है, जिससे राज्य सरकार को लंबे समय तक राजस्व प्राप्त होगा।

वर्तमान में जबलपुर जिला मध्य प्रदेश में लौह अयस्क उत्पादन का प्रमुख केंद्र माना जाता है और यहां 42 छोटी-बड़ी खदानें संचालित हैं, जिनमें से लगभग 35 खदानें लौह अयस्क की हैं। नए ब्लॉक मिलने से खनन गतिविधियों में और तेजी आने की संभावना है।

खनिज अधिकारी ए.के. राय के अनुसार जिले में चिन्हित चार स्थानों पर आयरन ओर, मैंगनीज और लैटराइट के ब्लॉक पाए गए हैं। फिलहाल भूमि सीमांकन का कार्य किया जा रहा है और पूरी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। आगे की प्रक्रिया शासन स्तर पर तय की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर खनिज भंडार मिलने से न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि क्षेत्र में रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।

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