भोपाल(ईन्यूज एमपी)- मध्य प्रदेश में सरकारी तंत्र कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। प्रदेश में ऑल इंडिया सर्विस के अधिकारियों से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों तक 1.5 लाख से अधिक पद खाली पड़े हैं। लंबे समय से इन पदों पर भर्ती नहीं होने के कारण प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है और कई विभागों में काम का बोझ बढ़ता जा रहा है। जानकारी के अनुसार राज्य के विभिन्न विभागों में हजारों पद वर्षों से रिक्त हैं। इनमें प्रशासनिक अधिकारी, तकनीकी कर्मचारी, शिक्षण स्टाफ और सहायक श्रेणी के कर्मचारी शामिल हैं। पद खाली होने के कारण कई कार्यालयों में कर्मचारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां निभानी पड़ रही हैं, जिससे कार्य की गति भी प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि कर्मचारियों की कमी का असर सीधे तौर पर शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ रहा है। कई विभागों में एक ही अधिकारी या कर्मचारी को कई पदों का काम संभालना पड़ रहा है। इससे आम जनता से जुड़े मामलों के निपटारे में भी देरी हो रही है। प्रदेश सरकार ने हाल के वर्षों में कुछ भर्तियां जरूर की हैं, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में पद अभी भी खाली हैं। रिपोर्ट के मुताबिक विधानसभा चुनाव के बाद करीब 29 हजार पदों पर नियुक्तियां की गई हैं, फिर भी एक लाख से अधिक पद अभी भी रिक्त बने हुए हैं। सरकार का कहना है कि विभिन्न विभागों से रिक्त पदों की जानकारी लेकर चरणबद्ध तरीके से भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके लिए वार्षिक भर्ती योजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि आने वाले समय में रिक्त पदों को भरकर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया जा सके। हालांकि रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं के लिए यह आंकड़ा एक बड़ी उम्मीद भी माना जा रहा है। यदि सरकार इन पदों पर भर्ती प्रक्रिया तेज करती है तो लाखों युवाओं को सरकारी नौकरी मिलने का रास्ता खुल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए रिक्त पदों को जल्द भरना बेहद जरूरी है, अन्यथा कर्मचारियों की कमी का असर शासन व्यवस्था और जनसेवा दोनों पर पड़ता रहेगा।