भोपाल(ईन्यूज एमपी)-मध्य प्रदेश में सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अधिकारियों को संविदा पर दोबारा नियुक्त किए जाने के फैसले को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। खासतौर पर लोक निर्माण विभाग सहित अन्य तकनीकी विभागों में कार्यरत वरिष्ठ अधिकारियों और अभियंताओं ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कई महत्वपूर्ण पद पहले से ही विभाग के कार्यरत अधिकारियों के लिए निर्धारित हैं, लेकिन रिटायर अधिकारियों को संविदा पर नियुक्त कर इन पदों पर बैठाया जा रहा है। इससे न केवल विभागीय अधिकारियों के पदोन्नति के अवसर प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि वर्षों से सेवा दे रहे अफसरों के अधिकारों का भी हनन हो रहा है। अधिकारियों का तर्क है कि विभाग में पहले से ही अनुभवी और योग्य अधिकारी उपलब्ध हैं, जो इन जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकते हैं। इसके बावजूद सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दोबारा मौका दिया जाना अनुचित है। कुछ अधिकारियों ने इसे विभागीय मनोबल गिराने वाला कदम बताया है। विरोध कर रहे अधिकारियों ने यह भी कहा कि कई अफसर रिटायरमेंट के नजदीक हैं और उन्हें उम्मीद थी कि वरिष्ठ पदों पर कार्य करने का अवसर मिलेगा, लेकिन संविदा नियुक्तियों के चलते उनके भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस संबंध में उच्च स्तर पर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। दूसरी ओर, प्रदेश में पहले से कार्यरत संविदा कर्मचारियों का भी कहना है कि जब नियमित और संविदा कर्मचारी वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, तब रिटायर अधिकारियों को दोबारा नियुक्त करना नीतिगत असंतुलन को दर्शाता है। उनका मानना है कि सरकार को पहले कार्यरत कर्मचारियों की समस्याओं और मांगों पर ध्यान देना चाहिए। फिलहाल शासन स्तर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि जिस तरह से विरोध बढ़ रहा है, उससे यह मामला आने वाले दिनों में प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा का विषय बन सकता है।