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सोन घड़ियाल अभ्यारण्य सीधी पहुंचे विदेशी मेहमान, सोन नदी में दिखे 34 भारतीय स्कीमर

सीधी(ईन्यूज एमपी)- सोन घड़ियाल अभ्यारण्य अंतर्गत चितरंगी परिक्षेत्र में एक बार फिर विदेशी मेहमानों की आमद से जैव विविधता की रौनक बढ़ गई है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी प्रवासी पक्षी भारतीय स्कीमर सोन नदी के तटों पर पहुंच गए हैं। वर्तमान में कुल 34 भारतीय स्कीमर सोन नदी के राजघाट एवं कुठली घाट क्षेत्र में देखे जा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार इन पक्षियों को पहली बार 10 दिसंबर 2025 को देखा गया था। ये प्रवासी पक्षी सोन नदी के इन्हीं रेतीले तटों पर गड्ढे बनाकर अंडे देंगे, उनका संरक्षण करेंगे तथा अपने बच्चों को उड़ान और शिकार के लिए तैयार करेंगे। भारतीय स्कीमर का प्रजनन काल फरवरी से मई के बीच रहता है। फरवरी के अंत से मार्च के अंत तक मादा एक बार में दो से पांच अंडे देती है, जिन्हें नर और मादा दोनों मिलकर सेते हैं।

तेज धूप और गर्मी से अंडों को सुरक्षित रखने के लिए नर और मादा स्कीमर बार-बार नदी के पानी में भीगकर अंडों को गीला करते हैं, जिससे उनका तापमान नियंत्रित रहता है। अंडों से चूजों के निकलने में लगभग 21 से 24 दिन का समय लगता है। मई माह में बच्चे निकलना शुरू हो जाते हैं। इस दौरान नर स्कीमर मछलियों का शिकार कर बच्चों के लिए भोजन उपलब्ध कराता है।

जून के अंतिम सप्ताह तक बच्चों को उड़ने योग्य और भोजन के लिए आत्मनिर्भर बना दिया जाता है। इसके बाद जून माह के अंत में ये प्रवासी पक्षी श्रीलंका, बांग्लादेश और चीन जैसे एशियाई देशों की ओर प्रस्थान कर जाते हैं।

भारतीय स्कीमर की लंबाई लगभग 40 से 43 सेंटीमीटर होती है। इसकी खास पहचान इसका निचला जबड़ा है, जो ऊपरी जबड़े की तुलना में अधिक लंबा होता है। ये पक्षी नदी की सतह के काफी पास उड़ान भरते हैं और अपने लंबे निचले जबड़े की मदद से मछली एवं अन्य कीटों को पकड़ते हैं।

क्षेत्र संचालक संजय टाइगर रिजर्व सीधी के मार्गदर्शन एवं उप संचालक के निर्देशन में चितरंगी परिक्षेत्राधिकारी चतुर सिंह, परिक्षेत्र सहायक फूलवती सिंह तथा बीटगार्ड रामसरोज मिश्रा द्वारा इन प्रवासी पक्षियों की सतत निगरानी की जा रही है, ताकि उनके सुरक्षित प्रजनन और संरक्षण को सुनिश्चित किया जा सके।

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