भोपाल(ईन्यूज एमपी)-मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में शनिवार को आयोजित एक शासकीय कार्यक्रम उस वक्त विवादों में घिर गया, जब राज्य सरकार के मंत्री की मौजूदगी में हुए कार्यक्रम में नॉनवेज नाश्ता परोसे जाने का मामला सामने आया। सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर उपलब्धियां गिनाने के लिए आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कीमा वड़ा पाव और फिश कटलेट परोस दिए गए, जिससे कार्यक्रम का माहौल बिगड़ गया और सियासी व सामाजिक बवाल खड़ा हो गया। जानकारी के मुताबिक, कार्यक्रम में मौजूद कई लोगों ने अनजाने में नॉनवेज नाश्ता कर लिया। जैसे ही उन्हें इसकी जानकारी मिली, उन्होंने आपत्ति जताते हुए हंगामा शुरू कर दिया। कुछ लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय बताते हुए नाराजगी जाहिर की और इसे ‘धर्म भ्रष्ट’ तक करार दिया। देखते ही देखते मामला तूल पकड़ गया और सोशल मीडिया पर भी इसकी चर्चा शुरू हो गई। मामले पर सफाई देते हुए राज्यमंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि नॉनवेज परोसने की न तो उनकी सहमति थी और न ही उन्होंने इस तरह का कोई निर्देश दिया था। उन्होंने कहा कि चाय-पानी और नाश्ते की व्यवस्था देखने वाले अधिकारियों से गंभीर लापरवाही हुई है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है और जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में यह स्पष्ट निर्णय लिया गया था कि किसी भी शासकीय आयोजन में मांसाहार नहीं परोसा जाएगा, जब तक कि विदेशी मेहमानों की विशेष मांग न हो। इसके बावजूद सरकारी कार्यक्रम में नॉनवेज परोसा जाना सरकार की नीति की खुली अवहेलना है। कांग्रेस ने सवाल उठाते हुए कहा कि जिस विभाग का बजट सबसे कम बताया जाता है, उसी के कार्यक्रम में महंगा नॉनवेज नाश्ता परोसा जाना समझ से परे है। इससे न केवल सरकार की किरकिरी हुई है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही भी उजागर हुई है। विपक्ष ने सरकार से मांग की है कि मांसाहारी भोज को लेकर अपनी नीति स्पष्ट करे, इस चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के नाम सार्वजनिक किए जाएं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। सरकारी कार्यक्रम में इस तरह की चूक ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही धार्मिक और सामाजिक संवेदनशीलता से जुड़े मुद्दे को भी हवा मिली है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस मामले में कितनी तेजी से ठोस कार्रवाई करती है और विपक्ष के आरोपों का किस तरह जवाब देती है।