भोपाल(ईन्यूज एमपी)-प्रदेश में दिसंबर और जनवरी के दौरान शीतलहर के प्रकोप को देखते हुए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा आयुक्त श्री तरुण राठी ने आवश्यक तैयारियों एवं जनजागरूकता के लिए एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने समस्त चिकित्सा महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि मैदानी अमले और आम नागरिकों को शीतलहर के लक्षण, बचाव उपाय तथा क्या करें और क्या न करें के संबंध में व्यापक रूप से जागरूक किया जाए। आयुक्त ने बताया कि इस अवधि में कई क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान 5 से 7 डिग्री सेल्सियस अथवा उससे कम दर्ज किया जाता है, जिससे जन-स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। अत्यधिक ठंड के कारण हाइपोथर्मिया, फ्रॉस्टबाइट जैसी शीतजनित बीमारियाँ हो सकती हैं और गंभीर परिस्थितियों में मृत्यु की संभावना भी रहती है। शीतलहर के दौरान 65 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजन, 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे, हृदय व श्वसन रोग से पीड़ित व्यक्ति, बेघर लोग, खुले स्थानों एवं निर्माण स्थलों पर कार्यरत श्रमिक तथा सड़क किनारे रहने वाले लोग अधिक संवेदनशील होते हैं। शीतलहर एक मौसम संबंधी स्थिति है, जिसमें न्यूनतम तापमान में अचानक गिरावट, ठंडी हवाएँ चलना तथा पाला या बर्फ जमने जैसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। एडवाइजरी में नागरिकों से अपील की गई है कि वे स्थानीय रेडियो, टीवी और समाचार पत्रों के माध्यम से मौसम की जानकारी नियमित रूप से लेते रहें। पर्याप्त गर्म कपड़े पहनें और कई परतों में वस्त्र धारण करें। सिर, गर्दन, हाथ और पैरों को अच्छी तरह ढकें तथा टोपी, मफलर, मोज़े और वॉटरप्रूफ जूतों का उपयोग करें। गर्म एवं तरल पेय पदार्थ जैसे चाय और सूप लें तथा संतुलित आहार के साथ विटामिन-सी युक्त फल-सब्जियों का सेवन करें। ठंडी हवा से बचें, यथासंभव घर के अंदर रहें और अनावश्यक यात्रा न करें। बच्चों, बुजुर्गों और असहाय व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है। आवश्यक दवाइयों, ईंधन, पेयजल और जरूरी सामग्री का पूर्व भंडारण रखने तथा ठंड से प्रभावित होने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेने के निर्देश दिए गए हैं। एडवाइजरी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अत्यधिक ठंड में खुले स्थानों पर लंबे समय तक न रहें, गीले कपड़े पहनकर न रहें और हाइपोथर्मिया से पीड़ित व्यक्ति को मादक पेय पदार्थ न दें। गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज न करने की अपील की गई है। हाइपोथर्मिया के लक्षणों में तेज कंपकंपी, अत्यधिक थकान, भ्रम की स्थिति, बोलने में कठिनाई और नींद आना शामिल हैं, जबकि फ्रॉस्टबाइट में हाथ-पैर की उंगलियों, कानों या नाक में सुन्नता तथा रंग सफेद या पीला पड़ सकता है। शिशुओं में ठंडी लाल त्वचा और ऊर्जा की कमी देखी जा सकती है। ऐसे मामलों को चिकित्सकीय आपात स्थिति मानते हुए व्यक्ति को तुरंत गर्म स्थान पर ले जाकर सूखे कंबल से ढकने और शीघ्र अस्पताल पहुंचाने की सलाह दी गई है। नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे अद्यतन मौसम पूर्वानुमान और शीतलहर संबंधी चेतावनियों पर सतत नजर रखें और जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।