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Home सीधी दर्पण सीधी में रेत पर 'रार': प्रशासन का दावा 'बड़ी कार्रवाई', जनता का सवाल- 'केवट' मोहरा, असली खिलाड़ी कौन?

सीधी में रेत पर 'रार': प्रशासन का दावा 'बड़ी कार्रवाई', जनता का सवाल- 'केवट' मोहरा, असली खिलाड़ी कौन?

सोन नदी में अवैध उत्खनन पर छापा: 63 घन मीटर रेत जब्त, रास्ते खोदे गए; छोटे पर गाज, बड़ों पर खामोशी?

सीधी, (ईन्यूज एमपी): सीधी जिले में सोन नदी का सीना चीरकर चल रहे अवैध रेत के काले कारोबार पर जिला प्रशासन ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई का दावा किया है। कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी के सख्त निर्देशों के बाद खनिज, पुलिस, राजस्व और सोन घड़ियाल अभयारण्य की संयुक्त टीम ने गोपदबनास तहसील के पिपरोहर घाट पर दबिश दी।

टीम ने मौके से 63 घन मीटर अवैध भंडारित रेत जब्त की और एक व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद जिला प्रशासन की जंहा पीठ थपथपाई जा रही है वंही कोतवाली पुलिस पर सबाल पैदा हो रहे हैं ...? सबाल यह भी जिले में यह प्रश्न खड़ा हो गया है कि क्या यह कार्रवाई वाकई निष्पक्ष है या फिर किसी छोटे मोहरे को 'बलि का बकरा' बनाकर असली मगरमच्छों को बचाया जा रहा है?

रात के अंधेरे में दबिश, रास्ते किए ब्लॉक जिला खनिज अधिकारी कपिलमुनि शुक्ला के नेतृत्व में संयुक्त दल ने 18-19 दिसंबर की दरमियानी रात पिपरोहर में शिकायत वाली जगह का निरीक्षण किया। सोन नदी क्षेत्र में अवैध उत्खनन के स्पष्ट सबूत मिले। माफियाओं के हौसले तोड़ने के लिए पुलिस अधीक्षक और संजय टाइगर रिजर्व के उपसंचालक के निर्देश पर सोन नदी घाट तक जाने वाले रास्तों पर जेसीबी से गहरे गड्ढे खोदकर उन्हें बाधित कर दिया गया, ताकि वाहनों की आवाजाही रोकी जा सके।

उठते गंभीर सवाल: क्या एक 'केवट' चला रहा था पूरा सिंडिकेट? जांचटीम ने पिपरोहर निवासी मुकेश केवट (पिता प्रेमलाल केवट) के खिलाफ 63 घन मीटर अवैध रेत भंडारण का प्रकरण दर्ज किया है। इसी बिंदु पर कार्रवाई कटघरे में है। स्थानीय जानकारों और दबी जुबान में हो रही चर्चाओं के अनुसार, रेत का यह विशाल काला कारोबार केवल एक केवट संचालित नहीं कर सकता। यह जगजाहिर है कि इसके पीछे कई रसूखदार और 'सफेदपोश' चेहरों का हाथ है।

जनता के बीच सवाल यह है कि जब असली खिलाड़ी सबको पता हैं, तो कार्रवाई की गाज सिर्फ एक छोटे स्तर के व्यक्ति पर ही क्यों गिरी? क्या प्रशासन दबाव में है या फिर यह कार्रवाई केवल फाइलों में 'जीरो टॉलरेंस' दिखाने की खानापूर्ति है?

बीट प्रभारी को नोटिस, स्कूल के पास ठेकेदार पर केस इस दौरान लापरवाही बरतने पर संबंधित वन बीट प्रभारी को संजय टाइगर रिजर्व द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। वहीं, एक अन्य मामले में लोहाड़ी टोला में प्राथमिक पाठशाला भवन के ठीक पीछे लोक निर्माण विभाग (PWD) के संविदाकार द्वारा अवैध मुरुम उत्खनन करते पाया गया। स्कूली बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डालने वाले इस ठेकेदार के खिलाफ भी मप्र खनिज नियम 2022 के तहत केस दर्ज किया गया है।

सरकारी विभाग भी नहीं दे रहे रॉयल्टी का हिसाब हैरानी की बात यह है कि जिले में सरकारी निर्माण एजेंसियां ही खनिज नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं। PWD, PIU, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, जल निगम, हाउसिंग बोर्ड और नगर पालिका जैसे कई विभागों ने अपनी परियोजनाओं में प्रयुक्त खनिजों और जमा रॉयल्टी का ब्योरा नहीं दिया है। बार-बार पत्राचार के बाद भी जानकारी न देने पर प्रशासन ने इन विभागों को भी कारण बताओ नोटिस थमाया है।

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