पूजा पार्क सीधी में ज्ञान, भक्ति और संस्कारों का हुआ अद्भुत संगम ------- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार पूरे प्रदेश में हुआ गरिमामय आयोजन ------ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार पूरे प्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इसी क्रम में पूजा पार्क सीधी में गीता जयंती का अत्यंत गरिमामय और आध्यात्मिक वातावरण से परिपूर्ण कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम की मुख्य आकर्षक कड़ी रही 1100 विद्यार्थियों, वेद पाठी आचार्यों, अधिकारियों तथा गणमान्य नागरिकों द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता के 15वें अध्याय का सामूहिक सस्वर पाठ, जिसने पूरे परिसर को आध्यात्मिक तरंगों और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया। सामूहिक स्वर में गूंजते गीता श्लोकों ने उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति को अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान की। कार्यक्रम में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत शैलेन्द्र सिंह सोलंकी, अपर कलेक्टर बी.पी. पाण्डेय, संयुक्त कलेक्टर राजेश शुक्ला, उपखंड अधिकारी गोपद बनास राकेश शुक्ला, कार्यक्रम प्रभारी अधिकारी डिप्टी कलेक्टर प्रियल यादव, नोडल अधिकारी पी.के. सिंह, जिला जनसंपर्क अधिकारी मुकेश मिश्रा, जिला संस्कृत प्रभारी सतीश पाण्डेय सहित गणमान्य नागरिक, आचार्यगण और सभी अधिकारियों ने भी विद्यार्थियों के साथ सस्वर गीता पाठ कर कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया। इस अवसर पर विश्व गीता प्रतिष्ठानम के जिला प्रमुख एडवोकेट महेंद्र शुक्ला एवं करुणेश तिवारी ने कार्यक्रम के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सरल, अनुशासित और उद्देश्यपूर्ण बनाने वाली सार्वभौमिक मार्गदर्शिका है। उन्होंने समाज में नैतिकता, सदाचार और कर्तव्यबोध बढ़ाने में गीता की भूमिका पर बल दिया। विद्यालयीन छात्र-छात्राओं द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों पर आधारित आकर्षक झांकियाँ, नृत्य, गीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिनसे कार्यक्रम में भक्ति, ऊर्जा और भारतीय सांस्कृतिक वैभव का सुंदर समावेश दिखाई दिया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित आचार्यों का साल और श्रीफल से सम्मान कर उन्हें विशेष आदरांजलि अर्पित की गई। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का मूल उद्देश्यकृगीता के ज्ञान, धर्म, योग, सदाचार और कर्तव्यपालन की जीवनदायी शिक्षाओं को जन-जन तक पहुँचाना है। जिला प्रशासन, विद्यालयीन संस्थाओं, आचार्यों और समाज के विभिन्न वर्गों की संयुक्त सहभागिता ने इस उद्देश्य को सीधी जिले में सार्थक रूप से अभिव्यक्त किया। सामूहिक सस्वर पाठ ने न केवल विद्यार्थियों में आध्यात्मिक ऊर्जा, अनुशासन और एकाग्रता जगाई, बल्कि समुदाय के स्तर पर सांस्कृतिक एकता और सकारात्मक माहौल भी स्थापित किया। गीता के 15वें अध्याय के सामूहिक उच्चारण ने उपस्थित जनसमूह में ज्ञान, धर्म और कर्मयोग के प्रति गहरी प्रेरणा जागृत की। कार्यक्रम की उल्लेखनीय सफलता ने यह प्रमाणित किया कि जब प्रशासन, समाज और शिक्षा प्रणाली एकसाथ मिलकर सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन हेतु प्रयास करते हैं, तो उसका प्रभाव न सिर्फ आयोजन स्थल तक सीमित रहता है, बल्कि व्यापक सामाजिक परिवेश को भी लंबे समय तक सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।