भोपाल(ईन्यूज एमपी)-मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक तथा पूर्व विधायकों के वेतन और भत्तों में बड़े स्तर पर बढ़ोतरी की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। संसदीय कार्य विभाग ने इसका विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर गुरुवार को मुख्यमंत्री को भेज दिया है। सरकार की कोशिश है कि यह विधेयक आगामी 1 दिसंबर से शुरू हो रहे विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाए। प्रदेश में पिछले नौ वर्षों से वेतन भत्ता बढ़ोतरी लंबित थी, जबकि पड़ोसी राज्य राजस्थान और छत्तीसगढ़ पहले ही बढ़ोतरी कर चुके हैं। विधायकों का वेतन होगा 1 लाख 70 हजार रुपये प्रस्ताव के अनुसार विधायकों के वेतन में करीब 60 हजार रुपये तक वृद्धि की जा सकती है। यह वृद्धि वर्तमान वेतन की लगभग 54 प्रतिशत होगी। फिलहाल विधायकों को लगभग 1 लाख 10 हजार रुपये मासिक प्राप्त होते हैं, जिसमें 30 हजार बेसिक सैलरी और 80 हजार भत्ते शामिल हैं। बढ़ोतरी के बाद वेतन बढ़कर 1 लाख 70 हजार रुपये होने की संभावना है। पूर्व विधायकों की पेंशन में भी बड़ा इजाफा कमेटी ने पूर्व विधायकों की पेंशन राशि में भी बढ़ोतरी का प्रस्ताव भेजा है। वर्तमान में पूर्व विधायकों को 20 हजार रुपये पेंशन और 15 हजार रुपये चिकित्सीय सहायता मिलाकर कुल 35 हजार रुपये मिलते हैं। प्रस्ताव के अनुसार इसमें 23 हजार रुपये की वृद्धि कर पेंशन 58 हजार रुपये की जा सकती है। प्रदेश में करीब 600 पूर्व विधायक हैं, जिनमें 60 लोग 90 वर्ष से अधिक, 80 लोग 80 से 90 वर्ष तथा 507 पूर्व विधायक 80 वर्ष से कम उम्र के हैं। मुख्यमंत्री, मंत्री और राज्य मंत्रियों के वेतन में 30 प्रतिशत तक वृद्धि मुख्यमंत्री का वर्तमान वेतन और भत्ता लगभग 2 लाख रुपये मासिक है, जिसे बढ़ाकर 2 लाख 60 हजार रुपये किया जा सकता है। मंत्रियों को मिलने वाली 1 लाख 70 हजार रुपये की मासिक राशि को बढ़ाकर 2 लाख 20 हजार रुपये तथा राज्य मंत्रियों को मिलने वाले 1 लाख 50 हजार रुपये को बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है। यह वृद्धि लगभग 18 से 30 प्रतिशत की श्रेणी में आएगी। विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के वेतन में भी संशोधन विधानसभा अध्यक्ष को वर्तमान में 1 लाख 85 हजार रुपये मासिक मिलते हैं। प्रस्ताव के अनुसार इसे 27 प्रतिशत बढ़ाकर 2 लाख 35 हजार रुपये करने पर सहमति बनी है। विधानसभा उपाध्यक्ष को 1 लाख 70 हजार रुपये मासिक मिलते हैं, जिसे 18 प्रतिशत बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है। नेता प्रतिपक्ष के वेतन और भत्ते को भी 1 लाख 70 हजार रुपये से बढ़ाकर लगभग 2 लाख 20 हजार रुपये करने का प्रस्ताव है। समिति की सिफारिशों के बाद बना प्रस्ताव इस वर्ष बजट सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कई विधायकों ने वेतन-भत्ते बढ़ाने की मांग उठाई थी। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने सरकार को सुझाव दिया कि वेतन वृद्धि पर विचार करने के लिए समिति बनाई जाए। मुख्यमंत्री की सहमति के बाद 27 अक्टूबर को तीन सदस्यीय समिति बनाई गई, जिसमें उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, विधायक अजय विश्नोई और विधायक सचिन यादव को सदस्य बनाया गया। अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन को सदस्य सचिव नियुक्त किया गया। समिति ने दो दौर की बैठकों के बाद अपनी सिफारिशें भेजीं, जिनमें विधायकों, पूर्व विधायकों, मंत्रियों और अन्य पदाधिकारियों के वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी का विस्तृत प्रस्ताव शामिल था। बीमा पर सहमति नहीं समिति के पास यह प्रस्ताव भी आया था कि विधायकों का 10 लाख रुपये तक का बीमा कराया जाए, लेकिन इस पर सरकार ने सहमति नहीं दी। कारण यह बताया गया कि विधायकों के इलाज का पूरा खर्च सरकारी खजाने से ही वहन किया जाता है। हर महीने लगभग 4.95 करोड़ रुपये का खर्च वर्तमान में – 199 विधायकों पर कुल खर्च लगभग 2 करोड़ 18 लाख 90 हजार रुपये – मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों पर करीब 2 करोड़ 75 लाख रुपये – विधानसभा अध्यक्ष पर लगभग 1 लाख 85 हजार रुपये प्रति माह खर्च होता है। वेतन बढ़ने के बाद यह राशि और अधिक बढ़ जाएगी। सरकार जल्द ही इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देकर विधानसभा के शीतकालीन सत्र में विधेयक के रूप में पेश कर सकती है। प्रदेश में बीते 18 वर्षों में यह पांचवीं बार होगा जब विधायकों और मंत्रियों के वेतन-भत्तों में बढ़ोतरी की जाएगी।