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Home मध्य प्रदेश मप्र में 21 साल बाद फिर दौड़ेंगी सरकारी बसें: ‘जनबस’ योजना को मिली मंजूरी, 25 जिलों में 10,879 बसें चलेंगी

मप्र में 21 साल बाद फिर दौड़ेंगी सरकारी बसें: ‘जनबस’ योजना को मिली मंजूरी, 25 जिलों में 10,879 बसें चलेंगी

भोपाल(ईन्यूज एमपी)- मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार ने 21 साल बाद एक बार फिर सरकारी बसें शुरू करने का निर्णय लिया है। नई प्रणाली के तहत बस सेवा को ‘जनबस’ नाम दिया गया है। इस व्यवस्था को संचालित करने के लिए सरकार ने **यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड नामक नई कंपनी बनाई है, जो 25 जिलों में बसों का संचालन करेगी।

18 नवंबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में कंपनी के संचालक मंडल की बैठक हुई, जिसमें 6 हजार से अधिक रूटों को मंजूरी दी गई। इन रूटों पर 10,879 बसें चरणबद्ध तरीके से चलाई जाएंगी। नई व्यवस्था की शुरुआत अप्रैल 2026 में इंदौर से होगी और अप्रैल 2027 तक पूरे प्रदेश में लागू कर दी जाएगी।


7 चरणों में लागू होगी ‘जनबस’ परियोजना

| फेज | शहर/संभाग | रूट | बसें | समय |
| ------- | ---------------------- | ------- | ---- | ----------- |
| पहला | इंदौर शहर | 32 | 310 | अप्रैल 2026 |
| दूसरा | इंदौर संभाग | 771 | 1706 | जून 2026 |
| दूसरा | भोपाल शहर | 50 | 152 | जुलाई 2026 |
| दूसरा | उज्जैन शहर | — | 127 | जुलाई 2026 |
| तीसरा | उज्जैन संभाग | 386 | 1318 | नवंबर 2026 |
| चौथा | सागर–जबलपुर संभाग | 1228 | 2635 | दिसंबर 2026 |
| पाँचवां | भोपाल–नर्मदापुरम संभाग | तय नहीं | 1843 | अप्रैल 2027 |
| छठवां | रीवा–शहडोल संभाग | तय नहीं | 1470 | अप्रैल 2027 |
| सातवां | ग्वालियर–चंबल संभाग | तय नहीं | 1318 | अप्रैल 2027 |

कैसा होगा संचालन?

नई व्यवस्था में राज्य सरकार पूरी प्रणाली की मॉनिटरिंग करेगी, जबकि निजी ऑपरेटर बसें चलाएंगे। इसके लिए सरकार और ऑपरेटरों के बीच कॉन्ट्रैक्ट किया जाएगा।

प्रदेश में वर्तमान में लगभग 60 हजार यात्री बसें पंजीकृत हैं, जिनमें से अधिकतर निजी संचालकों द्वारा चलाई जाती हैं। ‘जनबस’ योजना इन्हीं निजी ऑपरेटरों के साथ समन्वय में चलेगी, लेकिन नियंत्रण सरकार के हाथ में रहेगा।


किराया तय करने का अधिकार संभागीय कंपनियों को

राज्य में मौजूदा शहरी बस कंपनियों को ग्रामीण व संभागीय बस सेवा का दायित्व दिया गया है। इन्हें अपने क्षेत्रों में **किराया निर्धारण का अधिकार** भी मिला है।

इनमें प्रमुख कंपनियाँ हैं—

* भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड
* अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट
* जबलपुर, उज्जैन, सागर सिटी ट्रांसपोर्ट
* रीवा सिटी ट्रांसपोर्ट (रीवा–शहडोल संभाग)
* ग्वालियर–चंबल के लिए नई कंपनी

हर कंपनी को शुरुआती तौर पर 1 करोड़ रुपये का फंड दिया जाएगा।


प्रशासनिक ढांचा

नई व्यवस्था के लिए त्रि-स्तरीय सिस्टम बनाया गया है—

* **अध्यक्ष: राज्य सरकार द्वारा नियुक्त
* **डायरेक्टर: कलेक्टर या विकास प्राधिकरण के सीईओ
* **कार्यकारी संचालक: नगर निगम आयुक्त या प्राधिकरण के सीईओ
* **संचालक मंडल: लोक निर्माण एवं ग्रामीण अभियांत्रिकी विभाग के मुख्य अभियंता
हर जिले में एक सलाहकार समिति भी बनेगी, जिसमें प्रभारी मंत्री, कलेक्टर और जनप्रतिनिधि शामिल होंगे।


ग्रामीण, आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों पर विशेष फोकस

सरकार के अनुसार ‘जनबस’ योजना का सबसे बड़ा लक्ष्य है कि बसें सिर्फ शहरी नहीं, बल्कि **दूर-दराज गांवों और आदिवासी क्षेत्रों** तक पहुँचें। कई ऐसे इलाके जहाँ अब तक बस सुविधा नहीं थी, नई व्यवस्था में पहली बार जुड़ेंगे।

तकनीक से लैस होगी ‘जनबस’

* यात्रियों और ऑपरेटरों के लिए मोबाइल ऐप
* सभी बसों की निगरानी के लिए सेंट्रलाइज्ड डिजिटल डैशबोर्ड
* बसों से कार्गो सेवा भी मिलेगी, जिससे ऑपरेटरों की आय बढ़ेगी
* आधुनिक बस स्टैंड–डिपो–स्टॉप सभी जिलों में तैयार किए जाएंगे

ई-बसें भी चलेंगी

राष्ट्रीय ई-बस योजना के तहत मध्यप्रदेश को **582 ई-बसें** मिली हैं।
इनमें 472 मिडी बसें और 110 मिनी बसें शामिल हैं।
इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर और सागर में इनका संचालन किया जाएगा।

ई-बसों का किराया मौजूदा शहर बसों से **कम** होगा।
इनके रखरखाव का खर्च केंद्र सरकार **12 साल तक वहन करेगी**।


58 करोड़ की लागत से 10 डिपो

* भोपाल: बैरागढ़, कस्तूरबा नगर (14 करोड़)
* इंदौर: नायता मुंडला, चंदन नगर (6 करोड़)
* ग्वालियर: 2 डिपो
* जबलपुर: 2 डिपो
* उज्जैन: 1 डिपो
* सागर: 1 डिपो

केंद्र सरकार इसका 60% और राज्य सरकार 40% खर्च देगी।


‘जनबस’ योजना के साथ मध्यप्रदेश 21 साल बाद फिर सरकारी बस सेवा की ओर लौट रहा है।
यह प्रणाली न केवल शहरों बल्कि ग्रामीण इलाकों को भी विश्वसनीय सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

यह उम्मीद भी बढ़ी है कि नई व्यवस्था से

* यात्रियों को सुरक्षित और नियमित बस सेवा मिलेगी
* निजी ऑपरेटरों का नेटवर्क व्यवस्थित होगा
* और प्रदेश के परिवहन ढांचे में बड़ा सुधार दिखेगा।

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