तीन हीरे जेम्स क्वालिटी के — नीलामी में होगी बिक्री, खुशी से झूमे ग्रामीण पन्ना(ईन्यूज एमपी)- कहते हैं मेहनत और किस्मत जब साथ आती है, तो मिट्टी भी सोना उगल देती है। ऐसा ही हुआ पन्ना जिले के छह किसानों के साथ, जिन्हें शुक्रवार को एक साथ पांच हीरे मिले हैं। इन हीरों की अनुमानित कीमत करीब 12 लाख रुपए बताई जा रही है। भमका उथली हीरा खदान क्षेत्र में शुक्रवार सुबह यह पांच हीरे मिले, जिन्हें किसानों ने उसी दिन हीरा कार्यालय में जमा करा दिया है। अब इनकी नीलामी की जाएगी, जिससे प्राप्त राशि में से 12 प्रतिशत राजस्व सरकार को जाएगा और शेष राशि किसानों को मिलेगी। छह साथियों की मेहनत लाई रंग सिरस्वाहा गांव के किसान बृजेन्द्र कुमार शर्मा ने बताया कि उन्होंने अपने पांच साथियों — विनोद ओमरे, रामकरण नायक, सूर्यभान सिंह, गुलाब सिंह और पुष्पेन्द्र पाठक के साथ जून में हीरा खदान की जमीन का पट्टा लिया था। लगातार कई महीनों की मेहनत के बाद शुक्रवार को किस्मत ने मुस्कुरा दी और उनकी खदान से एक साथ पांच हीरे निकल आए। बृजेन्द्र ने बताया कि वे सभी किसान हैं और हीरा मिलना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। नीलामी से मिलने वाली राशि को वे आपस में बराबर बांटेंगे और इसे परिवार की जरूरतों, बच्चों की पढ़ाई और खेती सुधार में खर्च करेंगे। हीरा पारखी बोले — तीन हीरे जेम्स क्वालिटी के हीरा पारखी अनुपम सिंह ने बताया कि मिले हीरों का वजन क्रमशः 0.74 कैरेट, 2.29 कैरेट, 0.77 कैरेट, 1.08 कैरेट और 0.91 कैरेट है, जिनका कुल वजन 5.79 कैरेट है। इनमें से तीन हीरे जेम्स क्वालिटी के हैं, जो बाजार में अत्यधिक मूल्यवान माने जाते हैं। सरकारी और निजी पट्टे की प्रक्रिया पन्ना में सरकारी जमीन पर खदान के लिए आवेदन फॉर्म के साथ तीन फोटो, आधार कार्ड की कॉपी और 200 रुपए का चालान एसबीआई शाखा में जमा करना होता है। 20 दिन के भीतर पट्टा जारी किया जाता है। वहीं निजी जमीन में खदान खोलने के लिए जमीन मालिक से सहमति पत्र और किरायानामा आवश्यक होता है। ऐसे निकलता है हीरा पट्टा मिलने के बाद 8 बाय 8 मीटर की भूमि पर खुदाई की जाती है। मिट्टी को छानकर पानी से धोया जाता है और सूखने के बाद छनाई की जाती है। उसी प्रक्रिया में कभी-कभी हीरा निकलता है — जिसे स्थानीय लोग “किस्मत और मेहनत का संगम” कहते हैं। 12% राजस्व काटती है सरकार, साल में चार बार होती नीलामी हीरा कार्यालय में जमा हीरों की नीलामी हर तीन महीने में होती है। कुल कीमत में से 11% रॉयल्टी और 1% टीडीएस काटा जाता है। शेष राशि खोजकर्ता को दी जाती है। यह प्रक्रिया 1961 से पन्ना में चल रही है, जहां देशभर से व्यापारी बोली लगाने आते हैं। पन्ना फिर बना ‘हीरों की धरती’ का प्रमाण स्थानीय लोगों का कहना है कि पन्ना की मिट्टी में आज भी किस्मत चमकाने की ताकत है। किसानों को हीरे मिलने से क्षेत्र में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों ने कहा — “यह हमारे जिले के लिए सौभाग्य और मेहनत की मिसाल है।”