फर्जी खबरें चलाकर ब्लैकमेल करने वालों पर हाईकोर्ट सख्त — दो माह में कार्रवाई के आदेश इंदौर(ईन्यूज एमपी) सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और यूट्यूब पर झूठी व भ्रामक खबरें चलाने वालों पर अब कानून का शिकंजा कसने जा रहा है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने ऐसे मामलों में सख्ती दिखाते हुए गृह विभाग और धार एसपी को निर्देश दिया है कि वे दो माह के भीतर कार्रवाई करें, अन्यथा न्यायालय स्वयं कार्रवाई करेगा। जस्टिस प्रणय वर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया जिसमें शिकायतकर्ता विनोद पवार, निवासी धार जिले के पीथमपुर, ने आरोप लगाया था कि कुछ लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से उनके खिलाफ फर्जी खबरें प्रसारित कर बदनाम करने का प्रयास किया और उनसे छह लाख रुपये की अवैध मांग की। पवार के अधिवक्ता आदेश रावत ने कोर्ट को बताया कि आरोपी हिरकेश द्विवेदी ने होटल के बाहर खड़े होकर वीडियो बनाए और उसके बाद धमकाते हुए बड़ी रकम मांगी। पवार द्वारा जब इसकी शिकायत गृह मंत्रालय, धार पुलिस, फेसबुक और यूट्यूब से की गई, तब भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली। पांच मुकदमे पहले से दर्ज अदालत को बताया गया कि हिरकेश द्विवेदी पर 2012 से 2022 के बीच ब्लैकमेलिंग के पांच मुकदमे पहले से दर्ज हैं। इसके बावजूद उसके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इस पर न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि अब भी कार्रवाई नहीं की गई तो कोर्ट स्वयं हस्तक्षेप करेगा। केंद्र सरकार की ओर से जवाब केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन ने भरोसा दिलाया कि इस संबंध में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इसके बाद न्यायालय ने गृह विभाग और धार एसपी को निर्देशित किया कि वे पूर्व में दिए गए आवेदन पर सुनवाई करें और दो माह के भीतर ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करें। फर्जी खबरों और वसूली पर रोक की जरूरत हाईकोर्ट के इस आदेश को सोशल मीडिया पर बढ़ती फर्जी खबरों और तथाकथित “ऑनलाइन पत्रकारिता” के नाम पर ब्लैकमेलिंग की प्रवृत्ति पर लगाम लगाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि खबर के नाम पर अवैध वसूली करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।