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मझौली नगर परिषद अध्यक्ष का निर्वाचन शून्य घोषित, जिला न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला — तीन साल बाद मिला न्याय, पुनः होगा चुनाव

मझौली नगर परिषद अध्यक्ष का निर्वाचन शून्य घोषित, जिला न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला — तीन साल बाद मिला न्याय, पुनः होगा चुनाव

सीधी। जिले के मझौली नगर परिषद अध्यक्ष पद के निर्वाचन को जिला न्यायालय ने शून्य घोषित कर दिया है। न्यायालय ने यह फैसला देते हुए कहा कि 2022 में हुए नगर परिषद चुनाव के दौरान निर्वाचन प्रक्रिया में गंभीर त्रुटियां और अनियमितताएं हुई थीं। अदालत ने निर्वाचन को अमान्य घोषित करते हुए 30 हजार रुपये के जुर्माने का भी आदेश दिया है।

यह मामला वर्ष 2022 में हुए नगर परिषद मझौली के चुनाव से जुड़ा है। उस चुनाव में शंकर प्रसाद गुप्ता अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए थे। चुनाव परिणाम आने के बाद लवकेश सिंह गहरवार सहित 16 अन्य लोगों ने अदालत में याचिका दायर कर निर्वाचन प्रक्रिया को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि चुनाव के दौरान मतगणना में अनियमितताएं की गईं, जिससे परिणाम प्रभावित हुआ।

अदालत ने दोनों पक्षों के तर्क और प्रस्तुत साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण करने के बाद माना कि चुनाव प्रक्रिया में कई गंभीर खामियां रहीं। इसके आधार पर न्यायालय ने यह निर्णय सुनाया कि अध्यक्ष पद का निर्वाचन अवैध ठहराया जाता है। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि इस पद के लिए पुनः निर्वाचन की प्रक्रिया शुरू की जाए।

न्यायालय का आदेश: चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी साबित, पुनः होगा मतदान
अदालत ने 10 अगस्त 2022 को हुए मझौली नगर परिषद चुनाव की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका को स्वीकार करते हुए निर्वाचन को रद्द घोषित किया। निर्णय में कहा गया है कि मतगणना और निर्वाचन की प्रक्रिया में अपनाई गई गलत विधियों से परिणाम प्रभावित हुआ है। इसलिए यह आवश्यक है कि जनता के मताधिकार का सही प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए नए सिरे से चुनाव कराया जाए।

लवकेश सिंह गहरवार ने कहा – “सच्चाई की जीत हुई”
निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए याचिकाकर्ता लवकेश सिंह गहरवार ने कहा कि उन्होंने न्यायालय के इस आदेश का स्वागत किया है। उन्होंने बताया कि तीन वर्षों से वे न्याय की लड़ाई लड़ रहे थे और अंततः सच्चाई की जीत हुई है। उन्होंने कहा कि यह फैसला लोकतंत्र में पारदर्शिता और निष्पक्षता की दिशा में एक बड़ा कदम है।

आगे की प्रक्रिया
न्यायालय के आदेश के बाद अब जिला प्रशासन और राज्य निर्वाचन आयोग को अध्यक्ष पद के लिए पुनः चुनाव की अधिसूचना जारी करनी होगी। अनुमान है कि नई निर्वाचन प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ की जाएगी।

महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि
यह मामला न केवल मझौली बल्कि पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है। लगभग तीन वर्षों बाद न्यायालय का यह निर्णय सामने आया है, जिसने स्थानीय राजनीतिक परिदृश्य में हलचल मचा दी है। यह फैसला भविष्य के चुनावों के लिए भी एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें न्यायालय ने निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और वैधानिकता को सर्वोपरि माना है।

संक्षेप में –

* वर्ष 2022 में हुआ था मझौली नगर परिषद का चुनाव।
* शंकर प्रसाद गुप्ता बने थे अध्यक्ष।
* लवकेश सिंह गहरवार ने दाखिल की थी याचिका।
* न्यायालय ने निर्वाचन प्रक्रिया को शून्य घोषित किया।
* 30 हजार रुपये जुर्माने का भी आदेश।
* अब होगा पुनः चुनाव।

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