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इंद्रप्रस्थ नगर में बिजली का “स्मार्ट तमाशा” – स्मार्ट मीटर से बिल स्मार्ट, पर उपभोक्ता बेहाल

इंद्रप्रस्थ नगर में बिजली का “स्मार्ट तमाशा” – स्मार्ट मीटर से बिल स्मार्ट, पर उपभोक्ता बेहाल

सीधी।
नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 1, नई बस्ती इंद्रप्रस्थ नगर में इन दिनों बिजली से ज्यादा चिंगारियां लोगों के गुस्से में निकल रही हैं। न आंधी, न तूफान, न बारिश और न ही धुंधला आसमान – फिर भी हर शाम लोगों के घरों में “रोशनी का महोत्सव” नहीं, बल्कि “स्पार्क का उत्सव” मन रहा है।

स्विच और बोर्ड से मानो आतिशबाजी निकल रही हो। कभी खंभों पर चिंगारी फूटती है तो कभी घरों के बोर्ड से धुआं उठता है। आलम यह है कि पंखा, बल्ब, कूलर, फ्रिज और एसी तक “शहीद” हो चुके हैं। कई परिवारों के एक साथ चार-पांच उपकरण जल गए। एक परिवार ने तो बताया कि “उपकरण रिपेयर करा कर लाए, लेकिन अगले ही दिन फिर जल गए।”

लोग कह रहे हैं – “बिजली विभाग तो जैसे नया बिजनेस मॉडल चला रहा है – जितना बिल भरो, उतना उपकरण जलाओ।”
स्मार्ट मीटर लगे हैं, लेकिन उनकी स्मार्टनेस सिर्फ एक ही काम में है – उपभोक्ताओं को लंबा-चौड़ा बिल थमाने में।

स्थानीय लोगों की सीधी जुबानी

मोहल्ले के निवासी संजू केवट बोले, “हर महीने समय पर बिल भरते हैं, लेकिन रोजाना मैकेनिक को भी पैसे देना पड़ रहा है। आखिर हम जाएं तो जाएं कहां?”
* गृहिणी फूलकली ने कहा, “कूलर और फ्रिज जल गए, बच्चों का दूध तक खराब हो जाता है। विभाग वाले आते हैं, देखते हैं और कहकर चले जाते हैं कि सब सही है। क्या यही सेवा है?”
* मुहल्ले के निवासी शशिकांत ने तंज कसा, “ये स्मार्ट मीटर नहीं, स्मार्ट लूट का मीटर है। बिल से जेब खाली, और ऊपर से रोज नुकसान।”

विभागीय अधिकारी आते हैं, तारों को देखते हैं, और ऐसे चले जाते हैं मानो बिजली की समस्या नहीं, बल्कि कोई “प्रकृति का अद्भुत चमत्कार” हो।

स्थानीय लोग सवाल कर रहे हैं – “क्या हम बिल भरने के साथ-साथ रोजाना मरम्मत का जुर्माना भी दें?” उनका कहना है कि अगर विभाग ने समस्या की जड़ नहीं खोजी और हल नहीं निकाला, तो यह महज आर्थिक बोझ नहीं रहेगा, बल्कि कभी भी बड़ी जनहानि का कारण बन सकता है।

बिजली विभाग का हाल देखकर लोग अब यह तंज कस रहे हैं –
“स्मार्ट मीटर की यही पहचान,
बिल में स्मार्ट – सेवा में शून्य सम्मान।”

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