भोपाल (ईन्यूज एमपी)-मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे कान्हा जरूर आएं और प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों को देखने के साथ प्रकृति को करीब से जानने का अवसर प्राप्त करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि कान्हा में बाघ, तेंदुआ और बारहसिंगा सहित अनेक वन्यजीव प्राकृतिक वातावरण में फल-फूल रहे हैं। विशेष रूप से बारहसिंगा के संरक्षण और पुनर्वास में कान्हा ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। कभी विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी इस प्रजाति को यहां संरक्षण के जरिए नया जीवन मिला है। कान्हा में 100 साल बाद जंगली भैंसों की वापसी वन्यजीव संरक्षण की दिशा में कान्हा टाइगर रिजर्व में एक और महत्वपूर्ण पहल की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 11 अक्टूबर को सूपखार क्षेत्र में असम के काजीरंगा से लाए गए आठ जंगली भैंसों को बड़े बाड़े में छोड़ा। इनमें छह मादा और दो नर जंगली भैंसे शामिल हैं। करीब 100 साल बाद मध्य प्रदेश में इस प्रजाति की पुनर्बसाहट की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चीता परियोजना भी आगे बढ़ रही है। वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सहयोग से जंगली भैंसों को मध्य प्रदेश में फिर से बसाने की पहल संभव हुई है। प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण पर जोर मुख्यमंत्री ने बाघ, तेंदुआ, घड़ियाल और मगरमच्छ सहित विभिन्न वन्यजीवों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों को प्रदेश की समृद्ध प्राकृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने संरक्षण कार्यों में योगदान देने वाले सभी लोगों को बधाई देते हुए कहा कि वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखना सामूहिक जिम्मेदारी है। कान्हा की जैव विविधता, बारहसिंगा संरक्षण में इसकी भूमिका और जंगली भैंसों की पुनर्बसाहट जैसे प्रयास मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण को नई दिशा देने की कोशिशों को दर्शाते हैं।