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Home मध्य प्रदेश MP में 2,975 करोड़ की लागत से बनेगी चौथी रेल लाइन, कटनी से पेंड्रा रोड तक होगा विस्तार; किसानों की जमीन का होगा सर्वे

MP में 2,975 करोड़ की लागत से बनेगी चौथी रेल लाइन, कटनी से पेंड्रा रोड तक होगा विस्तार; किसानों की जमीन का होगा सर्वे

कटनी(ईन्यूज एमपी)- मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के रेल संपर्क को मजबूत करने की दिशा में कटनी-पेंड्रा रोड चौथी रेल लाइन परियोजना पर काम आगे बढ़ रहा है। करीब 2,975 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के तहत 201.37 किलोमीटर लंबा रेल ट्रैक बिछाया जाना प्रस्तावित है। परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है और सर्वे के जरिए यह चिह्नित किया जाएगा कि किन गांवों में कितनी निजी जमीन की आवश्यकता होगी।

कटनी, उमरिया, शहडोल और अनूपपुर में जमीन चिह्नित करने की तैयारी

परियोजना के लिए मध्यप्रदेश के कटनी, उमरिया, शहडोल और अनूपपुर जिलों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी है। सर्वे के बाद स्पष्ट होगा कि रेल लाइन के निर्माण के लिए किन क्षेत्रों की जमीन प्रभावित हो सकती है। संभावित प्रभावित किसानों और जमीन मालिकों की नजर अब सर्वे तथा मुआवजे से जुड़ी प्रक्रिया पर रहेगी।

2,975 करोड़ रुपये की है परियोजना

केंद्र सरकार ने 9 सितंबर 2026 को कटनी-पेंड्रा रोड चौथी रेल लाइन समेत तीन रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी थी। इन तीनों परियोजनाओं की अनुमानित लागत 10,783 करोड़ रुपये है। इनमें कटनी-पेंड्रा रोड चौथी रेल लाइन परियोजना पर लगभग 2,975 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
मालगाड़ियों के साथ यात्री ट्रेनों को भी मिलेगा फायदा

इस रेलखंड पर चौथी लाइन बनने से रेल परिचालन की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। खासतौर पर कोयले की ढुलाई करने वाली मालगाड़ियों के बढ़ते दबाव को संभालने में मदद मिल सकती है। अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होने से मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों को एक-दूसरे के लिए रास्ता देने की जरूरत कम हो सकती है।

इससे ट्रेनों के अनावश्यक ठहराव में कमी, परिचालन में सुधार और भविष्य में अतिरिक्त यात्री ट्रेनें चलाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। कटनी, शहडोल, अनूपपुर और बिलासपुर की ओर रेल से यात्रा करने वाले यात्रियों को भी इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। किसानों की नजर सर्वे और मुआवजे पर

रेल लाइन के लिए जमीन का सर्वे महत्वपूर्ण चरण होगा। इससे पता चलेगा कि किन गांवों के किसानों की जमीन परियोजना के दायरे में आ सकती है। हालांकि, अभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर प्रभावित होने वाली जमीनों का अंतिम विवरण और किसानों को मिलने वाले मुआवजे की राशि स्पष्ट नहीं है।

भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ प्रभावित जमीन मालिकों के लिए जमीन का सीमांकन, अधिग्रहण की शर्तें और मुआवजे से संबंधित जानकारी अहम रहेगी।

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