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सीधी के स्वास्थ्य विभाग में 9 महीने से वेतन गायब, अस्पताल में ड्यूटी जारी...

सीएमएचओ से कलेक्टर तक गुहार... फिर भी नहीं खुला भुगतान का रास्ता, कर्मचारी पूछ रहे—एक ही जिले में वेतन के लिए दो नियम क्यों?

सीधी(ईन्यूज़ एमपी)- सीधी जिले के सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों की सेवा और अस्पताल की व्यवस्थाएं संभाल रहे मल्टी टास्क वर्कर, डाटा एंट्री ऑपरेटर और प्यून कर्मचारी पिछले करीब 9 महीने से वेतन का इंतजार कर रहे हैं। कर्मचारी ड्यूटी पर हैं, काम लगातार हो रहा है, लेकिन मेहनताने का भुगतान कब होगा—इसका जवाब अब तक स्पष्ट नहीं है।

सिहावल, कुसमी, रामपुर नैकिन, चुरहट और सेमरिया क्षेत्र के विभिन्न सीएचसी तथा पोखरा, बंजारी, अमिलिया, करवाही, सिहावल, अमरपुर, कुसमी, सेमरिया, मझौली सहित विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत करीब 40 से 50 से अधिक कर्मचारियों के सितंबर 2025 से अगस्त 2026 तक के वेतन भुगतान लंबित बताए जा रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि इसी दौरान जिला अस्पताल में कार्यरत कुछ कर्मचारियों का भुगतान किए जाने की बात सामने आ रही है। ऐसे में कर्मचारियों का सीधा सवाल है—जब भर्ती और व्यवस्था एक ही स्वास्थ्य विभाग की है, तो भुगतान के मामले में जिला अस्पताल और सीएचसी-पीएचसी के कर्मचारियों के बीच यह अंतर क्यों?
वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों के सामने परिवार का खर्च चलाने से लेकर त्योहार मनाने तक का संकट खड़ा हो गया है। लंबे समय तक बिना मेहनताना काम करने की स्थिति ने उनकी आर्थिक परेशानियां और बढ़ा दी हैं।

कर्मचारियों के अनुसार, जब उन्होंने सीएमएचओ सीधी से वेतन भुगतान को लेकर गुहार लगाई तो उन्हें बताया गया कि उनकी भर्ती प्रक्रिया को लेकर आपत्ति है और मामला जांच के लिए भेजा गया है।

इसके बाद मंगलवार को कर्मचारी जनसुनवाई में कलेक्टर के समक्ष पहुंचे और लंबित वेतन भुगतान की गुहार लगाई। कर्मचारियों के मुताबिक, कलेक्टर ने भी भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की बात सामने आने पर सीएमएचओ को जांच के निर्देश दिए। अब वहीं कुछ कर्मचारी वेतन की आस में श्रम विभाग व न्यायालय की शरण में जाने लगे है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर भर्ती प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी है तो उसकी जांच पूरी होने तक कर्मचारियों से लगातार काम क्यों लिया जा रहा है? और यदि कर्मचारी विभाग के अस्पतालों में नियमित रूप से ड्यूटी कर रहे हैं, तो उनके मेहनताने का भुगतान आखिर कब होगा?
कर्मचारियों का कहना है कि वे उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारियों का लगातार निर्वहन कर रहे हैं। इसके बावजूद आठ महीने से वेतन लंबित है।

यानी अस्पताल में मरीजों का इलाज जारी है, कर्मचारियों की ड्यूटी जारी है, सरकारी व्यवस्था जारी है... बस कर्मचारियों की जेब में पहुंचने वाला वेतन ही जैसे रास्ते में कहीं अटक गया है।

अब देखना यह है कि जांच के नाम पर लंबित भुगतान की कहानी कितने दिन और चलती है और इन कर्मचारियों को उनके मेहनताने के लिए आखिर कब तक गुहार लगानी पड़ेगी।

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