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त्योहारों पर आबकारी विभाग की अचानक जागी नींद, 190 प्रकरण दर्ज कर थपथपा रहा अपनी पीठ!

सीधी (ईन्यूज एमपी)-त्योहारों का मौसम आते ही आबकारी विभाग को अवैध शराब के खिलाफ अपनी जिम्मेदारी याद आने लगी है। जिले में 190 प्रकरण दर्ज करने, 469.8 लीटर शराब और 2710 किलोग्राम महुआ लाहन जब्त करने तथा 90 मदिरा दुकानों का औचक निरीक्षण करने की कार्रवाई का ब्योरा जारी कर विभाग अपनी सक्रियता का प्रदर्शन कर रहा है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या इतनी कार्रवाई से जिले में अवैध शराब का कारोबार वास्तव में बंद हो गया है या फिर यह सब त्योहारों के दौरान कागजी सक्रियता दिखाने तक सीमित है?

जमीनी हकीकत पर नजर डालें तो जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण अंचलों तक अवैध शराब का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। शहर के आसपास के इलाकों से लेकर गांव-गांव तक कई ढाबों और चिन्हित दुकानों पर कथित तौर पर खुलेआम अवैध शराब परोसे जाने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। इसके बावजूद आबकारी विभाग की कार्रवाई आखिर इन ठिकानों तक प्रभावी ढंग से क्यों नहीं पहुंच पा रही है, यह अपने आप में गंभीर सवाल है।

विभाग की कार्रवाई में 190 प्रकरण दर्ज होने का आंकड़ा जरूर बड़ा दिखाई देता है, लेकिन सवाल कार्रवाई की संख्या का नहीं, बल्कि उसके वास्तविक परिणाम का है। यदि जिले में लगातार अवैध शराब का निर्माण, बिक्री और परिवहन हो रहा है तो इतनी बड़ी कार्रवाई के बावजूद कारोबार पर अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा? क्या विभाग को उन स्थानों की जानकारी नहीं है जहां नियमित रूप से शराब परोसी और बेची जा रही है, या फिर जानबूझकर उन ठिकानों से दूरी बनाए रखी जा रही है?

शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में शराब ठेकेदारों से जुड़े कुछ ठिकानों पर कथित मासिक लेन-देन और संरक्षण की चर्चाएं भी समय-समय पर उठती रही हैं। यदि इन चर्चाओं में सच्चाई नहीं है तो आबकारी विभाग को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं यदि कहीं अवैध रूप से शराब परोसने और बेचने के बदले किसी तरह का आर्थिक लेन-देन हो रहा है तो इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती? आखिर इन शिकायतों की जांच कौन करेगा?

आबकारी विभाग ने 90 कम्पोजिट मदिरा दुकानों का औचक निरीक्षण किया और 34 दुकानों से शराब के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे। लेकिन सवाल यह है कि विभाग की निगरानी केवल लाइसेंसी दुकानों तक ही क्यों सीमित दिखाई देती है? शहर के आसपास के ढाबों, ग्रामीण क्षेत्रों की दुकानों और उन स्थानों पर कार्रवाई कब होगी जहां कथित तौर पर बिना वैध अनुमति शराब परोसी जाती है?

कलेक्टर विकास मिश्रा के निर्देश पर जिला आबकारी अधिकारी संतोष सिंह कुशवाह के नेतृत्व में अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे में अब केवल प्रकरण दर्ज करने और जब्ती के आंकड़े जारी करने से आगे बढ़कर यह देखना जरूरी है कि जिले में अवैध शराब के वास्तविक ठिकानों पर कितनी कार्रवाई हुई। क्या किसी बड़े कारोबारी या संरक्षण देने वाले व्यक्ति पर कार्रवाई हुई? कितने ढाबों और अवैध बिक्री केंद्रों को बंद कराया गया? कितने मामलों में कारोबार दोबारा शुरू नहीं हुआ?

त्योहारों के दौरान शराब की अवैध बिक्री पर रोक लगाना केवल विभागीय प्रेस विज्ञप्ति जारी करने से संभव नहीं है। इसके लिए निष्पक्ष कार्रवाई, नियमित निगरानी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना जरूरी है। वरना हर त्योहार पर कुछ जब्ती, कुछ प्रकरण और बड़ी-बड़ी प्रेस विज्ञप्तियां जारी होती रहेंगी, लेकिन जमीन पर अवैध शराब का कारोबार अपनी जगह कायम रहेगा।

ठेकेदारों के मासिक शुल्क और विभागीय संरक्षण संबंधी बातों को फिलहाल आरोप/चर्चा के रूप में रखा गया है, स्थापित तथ्य के रूप में नहीं। प्रकाशन से पहले संबंधित ठिकानों, शिकायतों और स्थानीय प्रमाणों की पुष्टि करना उचित होगा। इससे खबर की धार भी बनी रहेगी और कानूनी मजबूती भी।

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