सीधी(ईन्यूज एमपी)-मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए चिकित्सकों को समर्पण, संवेदनशीलता और सेवाभाव के साथ काम करने की नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि चिकित्सक समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देकर ग्रामीणों का विश्वास जीतें। साथ ही आशा, एएनएम और कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर सहित मैदानी स्वास्थ्य अमले से लगातार संवाद और समन्वय बनाए रखें। शनिवार को भोपाल स्थित निवास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उप मुख्यमंत्री ने सीधी, सिंगरौली एवं डिंडोरी जिले में पदस्थ बॉन्डेड डॉक्टर्स से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए विशेष प्रयास करने का आह्वान किया। संवाद के दौरान जानकारी दी गई कि सीधी जिले में 16, सिंगरौली में 54 और डिंडोरी जिले में 21 नए बॉन्डेड डॉक्टर्स की पदस्थापना की गई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिली है। उप मुख्यमंत्री ने टीबी मुक्त भारत अभियान, राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन मिशन और एनीमिया मुक्त भारत सहित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने गर्भवती महिलाओं की शत-प्रतिशत प्रसवपूर्व जांच सुनिश्चित करने और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की समय रहते पहचान कर उन्हें बेहतर चिकित्सा संस्थानों तक पहुंचाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत प्रत्येक माह की 9 और 25 तारीख को होने वाली निःशुल्क जांच का लाभ सभी पात्र महिलाओं तक पहुंचाने के लिए जागरूकता बढ़ाने के निर्देश भी दिए। संवाद के दौरान सीधी जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनजारी में पदस्थ डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि क्षेत्र में लंबे समय से चिकित्सक की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। उनकी पदस्थापना के बाद ग्रामीणों में उत्साह बढ़ा है और ओपीडी में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरखरा में पदस्थ डॉ. आदित्य गौतम ने भी ओपीडी में मरीजों की संख्या में धीरे-धीरे वृद्धि होने की जानकारी दी। सिंगरौली जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गन्नई में पदस्थ डॉ. नितिश कुमार गुप्ता ने बताया कि प्रतिदिन लगभग 25 से 30 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। वहीं कोरसर में पदस्थ डॉ. सुभाष सिंह चंदेल ने बताया कि लंबे समय से डॉक्टर की उपलब्धता नहीं होने के कारण ग्रामीणों को परेशानी होती थी। उनकी पदस्थापना पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। उप मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य जांच के हब एंड स्पोक मॉडल को प्रभावी बनाने के साथ टेलीमेडिसिन और ई-संजीवनी का अधिकतम उपयोग करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में भी विशेषज्ञ चिकित्सकों का परामर्श उपलब्ध कराया जा सकता है। इसके साथ ही उच्च रक्तचाप, मधुमेह और मुख एवं स्तन कैंसर जैसी गैर-संचारी बीमारियों की स्क्रीनिंग तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिर की सेवाओं को सक्रिय बनाने पर जोर दिया। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि ग्रामीणजन चिकित्सकों को कलयुग का भगवान मानते हैं, लेकिन यह सम्मान उन्हीं चिकित्सकों को मिलता है जो मरीजों और पीड़ित मानवता को सर्वोपरि रखकर सेवा करते हैं। चिकित्सक की मधुर वाणी, संवेदनशीलता और आत्मीय व्यवहार मरीज के आधे कष्ट को दूर कर देता है। इसलिए बेहतर उपचार के साथ मरीजों के प्रति सम्मानपूर्ण व्यवहार भी जरूरी है। उन्होंने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को स्वास्थ्य संस्थानों में साफ-सफाई, आवश्यक सहयोगी स्टाफ और मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही सुमन पंचायत कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पंचायतों को प्रेरित करने और सुरक्षित मातृत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने को कहा। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सीधी कलेक्टर विकास मिश्रा, डिंडोरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया, सिंगरौली जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, तीनों जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सहित संबंधित विभागीय एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।