सीधी(ईन्यूज एमपी)-- इंदौर में आयोजित प्रगतिशील लेखक संघ मध्य प्रदेश के चौदहवें राज्य सम्मेलन के अवसर पर सोमेश्वर सिंह के कविता संग्रह चलो कहीं और चलें का लोकार्पण वरिष्ठ कवि कुमार अंबुज, सीपीआई राज्य सचिव शैलेंद्र शैली, छत्तीसगढ़ प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष नथमल शर्मा, हरनाम सिंह, मोहन कुमार डेहरिया, पवित्र सलालपुरिया, सारिका श्रीवास्तव, सत्यम पांडे के कर कमलों से संपन्न हुआ। कविता संग्रह की प्रस्तावना एसजीएस कॉलेज हिंदी विभाग की रिटायर्ड विवाह का अध्यक्ष डॉक्टर लहरी सिंह ने लिखी है। प्रकाशित पुस्तक की प्रस्तावना में प्रगतिशील मध्य प्रदेश लेखक संघ के वर्तमान अध्यक्ष डॉ सेवाराम त्रिपाठी में अपनी राय व्यक्त करते हुएसोमेश्वर सिंह को मैं वर्षों से जानता हूं उनके कितने रूप मेरे दिल के तहखाने में हैं, उनकी सोच मार्क्सवादी है, लेकिन पूरा घिरा हुआ जीवन उनके लेखन में प्रतिबिंबित होता है। जिसमें सच्चाई की सुगंध, आपबीती की एक ठसक और संवेदना का संसार है। सोमेश्वर सिंह के लेखन में जिंदगी के संघर्षों का ताप है। प्रलेस के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा की राय में सोमेश्वर सिंह की कविताओं में एक ईमानदार आदमी की छटपटाहट है, वह पत्रकार रहे हैं सामाजिक राजनीतिक जीवन को करीब से देखा है, इसलिए ऐसा लगता है कि वह कुछ जिम्मेदारियों से बचने के लिए कविता के माध्यम से कह देना चाहते हैं तथा अपने आप को अभिव्यक्त करने के लिए लिखते हैं। कविता संग्रह में मैं टिप्पणी देते हुए आकाशवाणी के पूर्व निदेशक राजीव शुक्ला ने कहा कि- सोमेश्वर सिंह की कविताएं सन्नाटे को तोड़ती हैं। उनकी कविताओं में अनेक रंग रूप में कविता का कर्म देखने को मिलता है, जो एक सहयात्री की तरह ऊष्मा साथ लेकर चलती है। चंचला बाई कॉलेज जबलपुर हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर संजुल शर्मा का कहना है कि कविता साहित्य की सबसे कठिन विधा है जो किसी इमारत की तरह तैयार की जाती है। जिसके लिए विचार, भाषा मजबूत होना चाहिए। सोमेश्वर सिंह की कविताएं आसानी से समझ में नहीं आती और जब समझ में आ जाती हैं तो वह आदमी को भीतर से हिला देती है। उनकी कविताओं में धार भी है, मार भी है और दुलार भी है। महादेवी वर्मा स्मृति सम्मान से पुरस्कृत सागर की कवित्री कुमारी पूजा दुबे ने सोमेश्वर सिंह को जन सरोकारी प्रतिबद्ध कवि बताते हुए कहा कि उनकी कलम सत्ता की विरुदावली नहीं गाती, वह सत्ता को आईना दिखाने का साहस रखती है। झंझावातों से घबराती नहीं, डटकर मुकाबला करती है। सोमेश्वर सिंह जन चेतना के संवाहक कवि, लेखक है। उनका जन से गहरा जुड़ाव है।