सीधी(ईन्यूज एमपी):मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश के 12 जिला अस्पतालों को निजीकरण से मुक्त रखने का फैसला किया है। इस निर्णय के पीछे टोंको-रोंको-ठोंको क्रांतिकारी मोर्चा और अन्य सामाजिक संगठनों का प्रभावशाली सत्याग्रह आंदोलन रहा। मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी ने बताया कि सरकार ने इन जिला अस्पतालों को निजी हाथों में सौंपने का टेंडर जारी किया था, जिसमें गरीब, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लोग महंगे इलाज से वंचित हो जाते। सीधी जिला, जहां अधिकतर आदिवासी और गरीब आबादी रहती है, भी इस फैसले से प्रभावित हो रहा था। सत्याग्रह आंदोलन दो महीने तक जिले के सातों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला मुख्यालय में चला। जिले के नागरिकों ने आंदोलनकारियों के साथ एकजुटता दिखाते हुए सरकार से मांग की कि यह फैसला वापस लिया जाए। आंदोलन के दौरान राजभवन को ज्ञापन सौंपा गया और बताया गया कि निजीकरण से जनता का भरोसा टूटेगा और महंगे इलाज के चलते गरीब दम तोड़ने को मजबूर होंगे। इस आंदोलन में आदिवासियों और गरीबों की व्यापक भागीदारी रही। उनके दृढ़ संकल्प और जज्बे ने आखिरकार सरकार को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया। सरकार द्वारा निजीकरण रोकने के फैसले पर आदिवासियों ने खुशी से सैला नृत्य किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सरकारी अस्पताल गरीबों के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। उमेश तिवारी ने इस जीत को जनता की एकजुटता और न्यायसंगत लड़ाई का नतीजा बताया। उन्होंने कहा कि जब संघर्ष जनहित के लिए होता है, तो सरकार को झुकना पड़ता है। आंदोलनकारियों ने यह साबित कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही दिशा में उठाए गए कदम हर मुश्किल को पार कर सकते हैं।