सीधी(ईन्यूज़ एमपी): सीधी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण के विरोध में आज अस्पताल बचाओ, जीवन बचाओ संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट के सामने सत्याग्रह आंदोलन का आयोजन किया गया। आंदोलन का नेतृत्व करते हुए टोको-रोको-ठोको क्रांतिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी ने सरकार के स्वास्थ्य निजीकरण निर्णय को जनविरोधी बताते हुए कहा, “यह फैसला गरीबों के जीवन पर कुठाराघात है। जो सरकारी अस्पताल कभी गरीबों का सहारा थे, अब वही उनकी पहुँच से बाहर हो जाएंगे।” प्रदेश सरकार के पीपीपी मॉडल पर 10 जिला अस्पताल, 348 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 51 सिविल अस्पताल निजी हाथों में सौंपने की योजना का ज़िक्र करते हुए तिवारी ने कहा कि इससे गरीब और मध्यमवर्गीय तबका इलाज से वंचित हो जाएगा। विपक्ष की चुप्पी पर सवाल: उमेश तिवारी ने सरकार के इस निर्णय पर विपक्ष की चुप्पी को भी घोर निंदनीय करार दिया। उन्होंने कहा, “यह सवाल सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए है कि गरीब की आवाज़ कौन सुनेगा? क्या जनता की समस्याओं पर ध्यान देना उनकी प्राथमिकता नहीं है?” निजीकरण के नतीजों पर चिंता: जन स्वास्थ्य अभियान के राष्ट्रीय संयोजक अमूल निधि ने चेताया कि निजीकरण से स्वास्थ्य सेवाएं लाभ का जरिया बन जाएंगी। निजी अस्पताल मरीजों से शुल्क वसूलेंगे और सस्ते दामों पर जमीन देकर बनाए गए मेडिकल कॉलेज भी गरीबों की पहुंच से दूर हो जाएंगे। बरगी बांध विस्थापित संघ के राजकुमार सिन्हा ने इसे "स्वास्थ्य के बाजारीकरण" की साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि यह कदम इंसानियत के खिलाफ है और इसके विरोध में एकजुट होना जरूरी है। ज्ञापन और आंदोलन की मांगें: आंदोलन के बाद राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में छह सूत्रीय मांगें रखी गईं, जिनमें स्वास्थ्य सुविधाओं के निजीकरण पर रोक, सरकारी मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, स्वास्थ्य बजट में वृद्धि और लंबित वेतन का भुगतान शामिल है। विशेषज्ञों की राय: रवि दत्त सिंह (किसान मजदूर महासंघ): “सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को खत्म करने से मजदूर और किसान तबाह हो जाएंगे।” लालदेव सिंह (सेवानिवृत्त उप पुलिस अधीक्षक): “यह निजीकरण इंसानियत का गला घोंटने जैसा है।” बतादें कि यह आंदोलन जनता के स्वास्थ्य के लिए एक नई चेतना की शुरुआत का प्रतीक है। सवाल सिर्फ अस्पतालों का नहीं, बल्कि गरीब की जिंदगी का है। अब देखना यह है कि सरकार इस आंदोलन की आवाज़ सुनेगी या निजीकरण के इस निर्णय पर अडिग रहेगी।