भोपाल (ईन्यूज एमपी) मध्यप्रदेश के आगर मालवा में मुआवजा वितरण में भ्रष्टाचार को लेकर कुंडालिया बांध निर्माण प्रारंभ से ही चर्चा में रहा हैक्ष, यह प्रकरण तो इस प्रकार का है कि इसमें जितनी गहराई से जांच की जाए उतनी अधिक परतें इसमें खुल सकती है। अब इसी तरह के एक मामले में लोकायुक्त कार्यालय, उज्जैन मैं 9 लोक सेवक सहित कुल 107 लोगों पर प्रकरण दर्ज किया है। लोकायुक्त उज्जैन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार लोकायुक्त की प्राथमिक जॉच में जो तथ्य सामने आए हैं उसके अनुसार कुण्डालिया बांध निर्माण के समय तहसील नलखेड़ा के ग्राम भण्डावद मे बांध निर्माण हेतु गांव का विस्थापन किया जाना था जिसके अंतर्गत ऐसे परिवार जिनमें 18 वर्ष से अधिक उम्र के पुरूष एवं 18 वर्ष से अधिक उम्र की अविवाहित महिलाओ को विस्थापन हेतु 5 लाख रुपए विशेष पुनर्वास भत्ता दिया जाना था जिसके लिये हितग्राहियों द्वारा किये गये आवेदनों के साथ संलग्न पहचान एवं उम्र संबंधी आवश्यक दस्तावेजों की जांच, महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी, विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, राजस्व निरीक्षक, पटवारी, ग्राम पंचायत सचिव, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कि संयुक्त कमेटी द्वारा की जानी थी किंतु ग्राम भण्डावद के हितग्राहियों के अभिभावकों द्वारा अपने 18 वर्ष से कम उम्र के अवयस्क बच्चों के आवेदन पत्र के साथ पहचान एवं उम्र संबंधी दस्तावेज जेसे- अंक सूची, आधार कार्ड, आदि में काट-छाट कर अवयस्क बच्चों को वयस्क दर्शाया कर उक्त कमेटी के अधिकारियों, बिचौलियों के साथ सांठ-गांठ कर नियमो के विरूद्ध जा कर अवैध रूप से लाभ प्राप्त किया गया । बतादें कि उक्त दस्तावेजा की जांच कमेटी द्वारा समुचित से नहीं की गई जिसके कारण कुंडलिया डैम विस्थापन के विशेष पुनर्वास भत्ता के तहत् आपात्र / अवयस्क हितग्राहियों को अवैध रूप से 5.85 करोड़ का भुगतान प्राप्त हुआ। जिससे शासन को वित्तीय क्षति कारित की गई इसलिए 9 लोक सेवको साहित बिचौलिए एवं हितग्राहियों सहित कुल 107 लोगों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन अधिनियम 2018 ) की धारा - 7ब 13 ( 1 ) । 13 (2) भ्र0नि0अधि0 1988 ( संशोधन 2018 ) एवं भारतीय दण्ड विधान की धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120 – बी के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर प्रकरण विवेचना में लिया गया है।