भोपाल (ईन्यूज एमपी): मध्यप्रदेश के परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार का खेल कोई नई बात नहीं, लेकिन इस बार सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या कारण था, जो ये गोरखधंधा इतने बड़े पैमाने पर चल रहा था और किसी को भनक तक नहीं लगी? क्या है इस खेल की जड़? इस पूरे घोटाले की जड़ विभाग में फैली 'ऊपर से नीचे तक की संरचनात्मक गड़बड़ी' है। RTO विभाग के अफसरों और नेताओं ने इस काली कमाई को एक व्यवस्थित तरीके से चलाया, जहां हर कर्मचारी से लेकर बड़े अफसर तक को इसकी हिस्सेदारी दी जाती थी। वसूली के पीछे मुख्य कारण थे: 1. परिवहन नियमों की अनदेखी: सड़कों पर नियमों को ताक पर रखकर ट्रक मालिकों और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स से अवैध वसूली की जाती थी। 2. नेताओं और अफसरों का गठजोड़: इस काली कमाई का बड़ा हिस्सा 'ऊपर तक' पहुंचता था, जिससे नेताओं और अफसरों का यह खेल बिना किसी रुकावट के चलता रहा। 3. कमजोर निगरानी प्रणाली: परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार रोकने के लिए न तो कोई कड़ी निगरानी थी और न ही कोई मजबूत शिकायत तंत्र। 4. बड़े पैमाने पर साठगांठ: विभागीय अधिकारी, पुलिस और ट्रांसपोर्ट यूनियन के बीच एक मजबूत गठजोड़ था, जो इस घोटाले को बढ़ावा देता रहा। डायरी में दर्ज 'काले धंधे' की दास्तान सौरभ शर्मा की 'काली डायरी' ने इस गोरखधंधे का पूरा ब्लूप्रिंट सामने ला दिया। इसमें 52 जिलों के RTO और बड़े अफसरों का नाम, उनके संपर्क नंबर और हर महीने की 'कमीशन राशि' तक का हिसाब है। विदेशों तक फैला नेटवर्क इस कमाई का बड़ा हिस्सा हवाला नेटवर्क के जरिए विदेशों में भेजा गया। सौरभ के सहयोगी चेतन ने जांच में खुलासा किया है कि इस पैसे से विदेशों में संपत्तियां खरीदी गईं और बड़े निवेश किए गए। क्या थी 'ऊपर तक सेटिंग'? हर महीने करोड़ों की उगाही से लेकर इसकी बंटवारा प्रक्रिया तक, सब कुछ 'ऊपर तक सेट' था। यह पैसा नीचे से ऊपर तक ऐसे पहुंचता था जैसे कोई पाइपलाइन हो। कौन-कौन फंसेगा? आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच अब 52 जिलों के RTO, जिला परिवहन अधिकारियों और कुछ बड़े नेताओं पर केंद्रित है। इस मामले में कई चौंकाने वाले नाम जल्द सामने आ सकते हैं। यह घोटाला न केवल परिवहन विभाग के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करता है, बल्कि इस बात की ओर भी इशारा करता है कि मध्यप्रदेश में व्यवस्थागत भ्रष्टाचार किस हद तक गहराया हुआ है। आने वाले दिनों में यह मामला और भी बड़ा खुलासा कर सकता है।