भोपाल (ईन्यूज़ एमपी): उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मध्यप्रदेश विधानसभा के पहले सत्र की 68वीं वर्षगांठ पर प्रदेश की लोकतांत्रिक परंपराओं, विकास यात्रा और भविष्य की योजनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यह गर्व का विषय है कि मध्यप्रदेश विधानसभा ने लोकतांत्रिक परंपराओं को सुदृढ़ करने में अपनी विशिष्ट भूमिका निभाई है। श्री शुक्ल ने बताया कि 17 दिसंबर 1956 से लेकर अब तक मध्यप्रदेश ने विकास और सुशासन की एक लंबी यात्रा तय की है। 1950 में संविधान लागू होने के बाद राज्य कई हिस्सों में विभाजित था। 1 नवंबर 1956 को राज्यों के पुनर्गठन के बाद मध्यप्रदेश का गठन हुआ, और तब से प्रदेश ने लोकतंत्र को मजबूत करते हुए विकास के नए आयाम स्थापित किए। 2003 से 2024: विकास की सुनहरी दास्तान: श्री शुक्ल ने 2003 से लेकर 2024 तक प्रदेश की अभूतपूर्व प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि सिंचाई क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आया है। जहां 2003 तक मात्र 7 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होती थी, वह अब बढ़कर 50 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आगामी परियोजनाओं से यह आंकड़ा 1 करोड़ हेक्टेयर तक पहुंचने की उम्मीद है। उप मुख्यमंत्री ने काली सिंध, पार्वती और चंबल नदियों को जोड़ने की ऐतिहासिक योजना का उल्लेख किया, जिसका भूमिपूजन 17 दिसंबर को प्रधानमंत्री द्वारा जयपुर में किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि 25 दिसंबर को छतरपुर में केन और बेतवा नदियों को जोड़ने की परियोजना शुरू होगी, जो 1.75 लाख करोड़ रुपये की लागत से 15 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचित करेगी। श्री शुक्ल ने प्रदेश की वित्तीय प्रगति पर चर्चा करते हुए कहा कि राज्य का कर्ज GDP के 3% से कम है। यह प्रदेश की वित्तीय स्थिरता और विकासशील छवि को दर्शाता है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने जिस उद्देश्य और संकल्प के साथ मध्यप्रदेश की नींव रखी थी, आज हम उस सपने को साकार करने में जुटे हैं। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर और सभी सदस्यों को शुभकामनाएं दीं और प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य के लिए संकल्प व्यक्त किया।