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Home मध्य प्रदेश अगर केंद्र से मदद मैं ही मांगू तो आप कुर्सी पर क्यों बैठे........शिवराज सिंह

अगर केंद्र से मदद मैं ही मांगू तो आप कुर्सी पर क्यों बैठे........शिवराज सिंह

भोपाल(ईन्यूज एमपी)- अब मध्य प्रदेश में बाढ़ से हुए नुकसान पर सियासत शुरू हो गई है। कमलनाथ सरकार के दो मंत्रियों के बयान कि शिवराज सिंह चौहान के षडयंत्र के चलते ही केंद्र सरकार से राज्य को 10 हजार करोड़ की राशि नहीं मिली पर पूर्व सीएम ने पलटवार किया है। चंबल अंचल के दौरे पर जाने से पहले आज शिवराज सिंह चौहान ने अपने ऊपर मध्य प्रदेश सरकार के मंत्रियों द्वारा लगाए गए आरोपों पर बोला कि, मैं प्रदेश सरकार से पूछना चाहता हूं कि राहत राशि के लिए उन्होंने कितने पत्र केंद्र सरकार को अब तक लिखें हैं? क्यों नुकसान का आकलन करके अब तक केंद्र सरकार को नहीं भेजा है ? अगर केंद्र सरकार से मदद भी मैं ही मांग लूं तो फिर आप मुख्यमंत्री की कुर्सी पर क्यों बैठे हैं? कांग्रेस के जो मंत्री ये बात बोल रहे हैं, उन्हें शर्म नहीं आनी चाहिए ! वो यहीं नहीं रूके, उन्होंने सरकार से सवाल पूछा कि वो ये बताए कि कितने मंत्री बाढ़ग्रस्त इलाकों में गए हैं। खुद मुख्यमंत्री कितने बाढ़ प्रभावित जिलों में पहुंचे हैं।

बता दें कि जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा और गृह मंत्री बाला बच्चन ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर गंभीर आरोप लगाए थे। पीसी शर्मा ने ये आरोप लगाया था कि, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश की जनता के साथ राजनीति कर रहे हैं। उनके षड्यंत्र के कारण ही केंद्र सरकार ने 14वें वित्त आयोग द्वारा तय राशि से 10 हजार करोड़ रुपए प्रदेश को नहीं दिए गए। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से कहा था कि वे इस राशि को मध्यप्रदेश को दिलवाकर प्रधानमंत्री का जन्मदिन सेवा दिवस के रूप में मनाएं।

इसके अलावा गृह मंत्री बाला बच्चन ने भी सरदार सरोवर बांध के मुद्दे पर मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। जिसमें उन्होंने शिवराज सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि शिवराज सिंह झूठ बोल रहे हैं कि केंद्र सरकार ने एमपी को एक हजार करोड़ रुपए की मदद दी है। इतना नहीं बाला बच्चन ने मंगलवार को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रीय फसल बीमा योजना को लेकर कहा था कि इसे प्रधानमंत्री फसल योजना बनाने का किसानों को कोई फायदा नहीं मिला। केंद्र ने राज्य को मिलने वाली राशि में कटौती कर दी और ये सब शिवराज सिंह चौहान के इशारे पर ही हो रहा है।

इसी पर आज शिवराज सिंह चौहान ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि, अगर गांधीसागर का पानी समय पर छोड़ा जाता तो आपदा इतनी भयानक नहीं होती। चंबल संभाग की जनता को भी इतना भुगतना नहीं पड़ता। सरकार की आपराधिक लापरवाही है। मैं इस आपदा पर प्रदेश सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग करता हूं। इस लापरवाही के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार ये बताए कि जुलाई, अगस्त और सितंबर में गांधी सागर में कितना पानी भरना था और कितना भरा गया।

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